बीकानेर, 07 अगस्त। राजस्थान पशुचिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, बीकानेर के प्रसार शिक्षा निदेशालय द्वारा 01 से 07 अगस्त तक सात दिवसीय डेयरी फार्मिंग पर उद्यमशीलता प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन शुक्रवार को किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कुलगुरु डॉ. सुमंत व्यास ने प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि पशुपालकों में उद्यमशीलता तथा पशुपालन से आर्थिक उत्थान करने हेतु विश्वविद्यालय द्वारा कौशल विकास कार्यक्रम की पहल की गई है, जिसमें राज्य के विभिन्न जिलों से इच्छुक प्रशिक्षणार्थी प्रशिक्षण प्राप्त कर स्वरोजगार अपना सके। कुलगुरु डॉ. सुमंत व्यास में डेयरी फार्मिग के आर्थिक सुद्दढ़ीकरण हेतु पशुफार्म में रिकार्ड संधारण, बायोगैस उपयोगिता, कृत्रिम गर्भाधान एवं वैज्ञानिक तकनीकों को अपना कर डेयरी फार्मिंग को आर्थिक स्वावलाम्बी बनाने हेतु प्रोत्साहित किया। निदेशक प्रसार शिक्षा प्रो. राजेश कुमार धूड़िया ने डेयरी फार्मिग के क्षेत्र में बुनियादी जानकारी प्रदान करते हुए कार्यक्रम का विस्तृत विवरण बताया और कहा कि सात दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षणार्थियों को डेयरी फार्मिग की विभिन्न पहलूओं एवं प्रबंधन के साथ-साथ डेयरी फार्मिग के लिए सरकारी योजनाओं से अवगत करवाया गया तथा इस दौरान प्रशिक्षणार्थियों को पशुधन अनुसंधान केन्द्र, बीकानेर, कोड़मदेसर एवं बीछवाल तथा उरमूल डेयरी एवं लोटस डेयरी का भ्रमण करवाया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में बीकानेर, हनुमानगढ़, जयपुर, नागौर जिले के 20 प्रशिक्षणार्थियों ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षार्थियों को प्रशिक्षण सदर्शिका का वितरण किया गया। कार्यक्रम के आयोजन में प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. विजय बिश्नोई, डॉ. देवीसिंह एवं डॉ संजय सिंह का सहयोग रहा। प्रशिक्षण उपरान्त प्रशिक्षार्थियों को प्रशस्ति-पत्र वितरित किये गये।