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राजस्थान पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्‍वविद्यालय, बीकानेर
Rajasthan University of Veterinary and Animal Sciences, Bikaner (Accredited by VCI and ICAR)

वेटरनरी विश्वविद्यालय अंतर्राष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस पर सेमिनार आयोजित

बीकानेर, 05 सितम्बर। राजस्थान पशुचिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, बीकानेर के वन्यजीव प्रबंधन एवं स्वास्थ्य अध्ययन केंद्र द्वारा अंतर्राष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस-2026 के अवसर पर शनिवार को विशेषज्ञ व्याख्यान एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. सुमंत व्यास ने कहा कि गिद्ध हमारे पारिस्थितिकी तंत्र के अत्यंत महत्वपूर्ण घटक हैं। इनके संरक्षण के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण, जन-जागरूकता तथा पशुचिकित्सा एवं वन्यजीव क्षेत्र के बीच समन्वय आवश्यक है। भावी पशु चिकित्सकों को वन्यजीव संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनाना समय की आवश्यकता है। कार्यक्रम के अंतर्गत राजकीय डूंगर महाविद्यालय, बीकानेर के प्राणीशास्त्र विभाग के डॉ. प्रताप सिंह ने “आकाश के राजा: खतरे और संरक्षण की रूपरेखा” विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान दिया। व्याख्यान में गिद्धों के पारिस्थितिक महत्व, उनकी घटती संख्या, मानव जनित खतरों तथा संरक्षण की प्रभावी रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यकारी अधिष्ठाता एवं संकायाध्यक्ष वेटरनरी महाविद्यालय, बीकानेर प्रो. मनीषा माथुर ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि गिद्ध प्रकृति के स्वच्छता प्रहरी हैं और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। मंच का संचालन करते हुए केन्द्र के प्रधान अन्वेषक डॉ. जे.पी. कच्छावा ने बताया कि गिद्ध मृत पशुओं के शवों का प्राकृतिक रूप से निस्तारण कर पर्यावरण को स्वच्छ रखने तथा संभावित रोगों के प्रसार को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि गिद्ध संरक्षण केवल वन्यजीव संरक्षण का विषय नहीं है, बल्कि यह पशु स्वास्थ्य, जनस्वास्थ्य और पर्यावरणीय संतुलन से भी सीधे जुड़ा हुआ है। कार्यक्रम के अंत में निदेशक क्लिनिकस प्रो. प्रवीण बिश्नोई ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के संकाय सदस्य एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।