header logo image

राजस्थान पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्‍वविद्यालय, बीकानेर
Rajasthan University of Veterinary and Animal Sciences, Bikaner (Accredited by VCI and ICAR)

अनुसंधान में नवाचारों का बौद्धिक संपदा संरक्षण विषय पर व्याख्यान का आयोजन

बीकानेर 08 जुलाई। पशुचिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय, बीकानेर में बुधवार को बौद्धिक संपदा संरक्षण विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलगुरु डॉ. सुमंत व्यास ने कहा कि संकाय सदस्यों एवं विद्यार्थियों का शोध कार्य नवाचार युक्त हो एवं कार्य के प्रति संतुष्टि का भाव हो। कुलगुरु डॉ. सुमंत व्यास ने शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को शोध के कार्य क्षेत्र का सकारात्मक चुनाव करने, तकनीको की वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाओं का व्यापक विश्लेषण को केन्द्रित करते हुए शोध एवं नवाचारों हेतु प्रेरित किया। महाविद्यालय की एलुमनाई डॉ. भारती जैन द्वारा “नवाचार, रचनात्मकता और विचार-मंथन: अनुसंधान परिणामों को संरक्षित बौद्धिक संपदा में परिवर्तित करना” विषय पर व्याख्यान दिया गया एवं इस दौरान संवादात्मक सत्र का आयोजन किया गया। डॉ. भारती जैन द्वारा व्याख्यान में संकाय सदस्यों के साथ पेटेंट और कॉपीराइट के दायरे और स्नातकोत्तर एवं पीएचडी अनुसंधान कार्य के स्वरूप में संभावित सुधारों पर चर्चा की, ताकि इसे संरक्षित बौद्धिक संपदा में परिवर्तित किया जा सके। अधिष्ठाता प्रो. बी.एन. श्रृंगी ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि विद्यार्थियों का शोध कार्य विषय विशिष्ट एवं समाज के लिए लाभकारी होना चाहिए। उन्होंने शोध मे बौद्धिक संपदा संरक्षण पर भी प्रकाश डाला। कार्यक्रम के अंत धन्यवाद भाषण देते हुए प्रसार शिक्षा निदेशक प्रो. राजेश कुमार धूड़िया ने कहा कि शोधार्थियों को शोध के उद्देश्य निर्धारित करते हुए रणनीतिक विश्लेषण करना चाहिए ताकी विविध क्षेत्रों में विकास की संभावनाएं प्रबल हो सके। कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय के अधिकारी, शिक्षक एवं विद्यार्थी मौजुद रहे। कार्यक्रम के दौरान मंच संचालन डॉ. अशोक गौड़ द्वारा किया गया।