बीकानेर 01 जून। राजस्थान पशुचिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, बीकानेर में सोमवार को “गो आधारित औषधि की पशु चिकित्सा में भूमिका” विषय पर व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलगुरु डॉ. सुमंत व्यास ने कहा कि हमारी पारम्परिक चिकित्सा पद्धति अत्यन्त सुदृढ है एवं वर्तमान समय में नित नई बीमारियों के प्रकोप एवं संक्रामकता को देखते हुए प्राचीन ज्ञान एवं विज्ञान की महत्ता को समझना होगा। उन्होंने कहा की हमें एलोपेथी के साथ-साथ पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के ज्ञान का समावेश करते हुए प्रभावी चिकित्सा पद्धतियों के उपयोग पर बल देना होगा। कुलगुरु डॉ. सुमंत व्यास ने विद्यार्थियों को सफलता हेतु निरंतर कर्मशील रहने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता शंकर लाल जी ने गौ आधारित उपचार पद्धति के दैनिक जीवन में उपयोग एवं लाभ के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया की गाय जनित उत्पाद जैसे गाय का दुग्ध एक सम्पूर्ण आहार के साथ-साथ कई औषधीय गुणों का भंडार है। उन्होंने गाय के घी का पशु चिकित्सा एवं मानव चिकित्सा में प्रयोग, गाय के गोबर एवं गौमूत्र का उर्वरक के रूप में उपयोग एवं कम्प्रेस्ड बायोगैस का ईंधन के रूप में प्रयोग आदि विषयों को विस्तार से बताया। अधिष्ठाता वेटरनरी महाविद्यालय, बीकानेर प्रो. बी.एन. श्रृंगी ने स्वागत भाषण दिया एवं पारम्परिक चिकित्सा पद्धति के महत्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के अंत में निदेशक प्रसार शिक्षा प्रो. आर.के. धूड़िया ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए भारतीय चिकित्सा पद्धति को सहजने एवं वर्तमान परिवेश में उपयोग की प्रासंगिकता पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के अधिकारी एवं कर्मचारीगण संकाय सदस्य एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान मंच संचालन डॉ. अशोक गौड़ ने किया।