राजस्थान पशुचिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, बीकानेर के प्रसार शिक्षा निदेशालय द्वारा अंतर्राष्ट्रीय चारागाह एवं घुमन्तु पशुपालक वर्ष – 2026 के तहत “मरूस्थलीय घुमन्तु एवं अर्द्धघुमन्तु पशुपालक – महत्व एवं चुनौतिया” विषय पर सोमवार को एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अखिल भारतीय घुमन्तु कार्य प्रमुख श्री दुर्गादास जी तथा विशिष्ठ अतिथि प्रबंध मण्डल सदस्य, राजुवास, बीकानेर जगमाल सिंह राईका रहे। मुख्य अतिथि, दुर्गादास जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि राजस्थान की मरुभूमि और विषम जलवायु के बीच पशुपालन ही कृषकों का एक आर्थिक सहारा है। उन्होंने बताया कि राजस्थान की विषम जलवायु परिस्थितीयों में जहां वर्षा की कमी है, वहाँ पशुपालन ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को समृद्ध करता है। पशुपालन से न केवल दूध, बल्कि ऊन, चर्म और मांस उद्योग को भी बढ़ावा मिलता है। उन्होने कहा कि पशुपालन राजस्थान की अर्थव्यवस्था का सबसे मजबूत स्तंभ है। मुख्य अतिथि ने कार्यशाला में पशुपालकों के पास मौजूद “पीढ़ी-दर-पीढ़ी“ ज्ञान की सराहना की और कहा कि पशुपालक बिना किसी औपचारिक डिग्री के भी पशुचिकित्सा और वनस्पतियों के औषधीय गुणों के विशेषज्ञ होते हैं। वे चारागाह प्रबंधन और जल स्रोतों की बेहतर समझ रखते हैं, जो उन्हें विषम परिस्थितियों में भी सुरक्षित रखता है। उन्होने एक राज्य से दूसरे राज्य में पशुओं के पलायन के समय आने वाली विभिन्न समस्याओं एवं अड़चनों विषयों पर भी अपने विचार साझा किए। उन्होने कहा कि मंगला पशु बीमा योजना जैसी सरकारी योजनाओं को आसानी से पशुपालकों तक पहुँचाया जाना चाहिए तथा चारागाह को पुनर्जीवित करने के मॉडल को पूरे राजस्थान में लागू करना चाहिए। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलगुरु वेटरनरी विश्वविद्यालय, बीकानेर डॉ. सुमंत व्यास ने बताया कि इस कार्यशाला के अंतर्गत राजस्थान में घुमन्तु एवं अर्द्धघुमन्तु पशुपालकों की जीवन पद्धति की वर्तमान स्थिति का आकलन करना, पशु जैव विविधता के संरक्षण में घुमन्तु एवं अर्द्धघुमन्तु पशुपालकों की भूमिका को रेखांकित करना, घुमन्तु एवं अर्द्धघुमन्तु पशुपालक समुदायों की प्रमुख समस्याओं एवं बाधाओं की पहचान करना तथा सतत पशुपालन व्यवस्था के लिए नीतिगत सुझाव एवं सिफारिशें तैयार करना मुख्य उद्देश्य है। उन्होने कृषि उपजों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एम.एस.पी.) की तरह पशु उत्पादों के लिए भी एम.एस.पी. की अवधारणा सुझाई। उन्होने भेड़ और बकरियों की बिक्री के लिए उनके ‘लाइव वैट‘ (जीवित वजन) के आधार पर निर्धारित मूल्य तय करने की प्रणाली पर भी विचार प्रकट किये। उन्होने कृषि व्यवसाय की तरह ही पशुधन व्यवसाय एवं विपणन को एक अलग पहचान देने पर जोर दिया। कुलगुरु डॉ. सुमंत व्यास नेे कार्यशाला में उपस्थित पशुपालकों को उनके विचारों एवं समस्याओं को दस्तावेजी रूप देकर, विश्वविद्यालय स्तर पर राज्य सरकार एवं अन्य संबंधित संस्थानों को अवगत करवाने के बारे में बताया। कार्यक्रम के दौरान विशिष्ट अतिथि प्रबंध मण्डल, सदस्य, राजुवास, बीकानेर जगमाल सिंह राईका ने अपने सम्बोधन में उन्होने कहा कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य पशुपालन के क्षेत्र में नए नवाचारों को अपनाना और समाज के सहयोग से इस विरासत को बचाना है। उन्होने वर्तमान समय में पशुपालन से युवाओं के कम होते रूझान पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भविष्य में “सड़क किनारे प्याऊ और ये पगड़ी वाले ताऊ, खेजड़ी का ठूंठ और मरुस्थल में ऊंट ढूंढते रह जाओगे” पक्ति चरितार्थ हो जाएगी। उद्घाटन सत्र के प्रारम्भ में अधिष्ठाता वेटरनरी महाविद्यालय, बीकानेर प्रो. बी.एन. श्रृंगी ने स्वागत भाषण दिया। कार्यक्रम के दौरान प्रसार शिक्षा निदेशालय द्वारा प्रकाशित पुस्तक “उन्नत पशुपालन और पशु विज्ञान के प्रसार में राजुवास के प्रमुख आयाम” का विमोचन किया गया। निदेशक प्रसार शिक्षा प्रो. राजेश कुमार धूड़िया ने तकनीकी सत्र की जानकारी प्रदान करते हुए बताया कि कार्यशाला के दौरान छोटे एवं बड़े जुगाली करने वाले पशुओं पर मंथन हेतु दो अलग-अलग तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया, जिसमें घुमन्तु एवं अर्द्ध घुमन्तु पशुपालकों की समस्याओं को तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा सुना गया एवं उनके निस्तारण हेतु चर्चा की गई। छोटे पशुओं के तकनीकी सत्र में उरमूल सीमांत समिति, बज्जू सुशीला ओझा, ऊन उद्योगपति, बीकानेर कमल कल्ला, सी.ई.ओ., समाख्या सस्टेनेबल अल्टरनेटिव्स, बज्जू प्रेरणा अग्रवाल और वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख, के.वी.के., जैसलमेर डॉ. दीपक चतुर्वेदी तथा प्रमुख वैज्ञानिक, सी.एस.डब्लू.आर.आई. डॉ. आशीष चौपड़ा पैनेलिस्ट रहे। बड़े पशुओं के तकनीकी सत्र में प्रबंध मण्डल, सदस्य, जगमाल सिंह राईका, सी.ई.ओ., बहुला नेचुरल प्रो. लि. आकृति श्रीवास्तव, पूर्व अधिष्ठाता वेटरनरी महाविद्यालय, बीकानेर प्रो. जे.एस. मेहता पैनलिस्ट रहे तथा इस सत्र की अध्यक्षता पूर्व निदेशक क्लिनिक, राजुवास, बीकानेर प्रो. टी.के. गहलोत द्वारा की गई वही प्रमुख वैज्ञानिक एन.आर.सी.सी. डॉ. वेद प्रकाश सह-अध्यक्ष रहे। कार्यक्रम के दौरान कुलसचिव पंकज शर्मा, वित्त नियंत्रक विनोद कुमार यादव, प्रति-कुलगुरु, राजुवास, बीकानेर प्रो. हेमन्त दाधीच, निदेशक पी.एम.ई. प्रो. उर्मिला पानू, अधिष्ठाता डेयरी महाविद्यालय बीकानेर प्रो. राहुल सिंह पाल, परीक्षा नियंत्रक डॉ. सुनीता पारीक, प्रभारी निदेशक कार्य (भू संपदा) डॉ. नरेन्द्र सिंह राठौड़, समन्वयक जनसम्पर्क प्रकोष्ठ डॉ. देवी सिंह, सहायक निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. संजय सिंह, पशुपालन विभाग के डॉ. संजय शर्मा सहित विश्वविद्यालय के संकाय सदस्य, कर्मचारीगण, विद्यार्थी, बीकानेर गणमान्य, घुमन्तु एवं अर्द्धघुमन्तु पशुपालक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान मंच संचालन डॉ. प्रतिष्ठा शर्मा ने किया।