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राजस्थान पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्‍वविद्यालय, बीकानेर
Rajasthan University of Veterinary and Animal Sciences, Bikaner (Accredited by VCI and ICAR)

छोटे पशुओं में लेप्रोस्कोपिक सर्जरी पर प्रशिक्षण शुरु

बीकानेर, 22 जनवरी। राजस्थान पशुचिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय बीकानेर के सर्जरी एवं रेडियोलॉजी विभाग द्वारा पशु चिकित्सकों का तीन दिवसीय लेप्रोस्कोपी तकनीको पर प्रशिक्षण गुरुवार से शुरू हुआ। यह प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आई.सी.ए.आर.) के अधीन डीमिस्का नेटवर्क प्रोजेक्ट के अंतर्गत आयोजित किया गया जा रहा है। केन्द्र के मुख्य अन्वेषक प्रो. प्रवीण बिश्नोई ने बताया कि इस प्रशिक्षण में चिकित्सकों को लैप्रोस्कोपी से संबंधित विभिन्न तकनीकों, स्टरलाइजेशन, बायोप्सी, ऑपरेशन संसाधन, सुचर तकनीको आदि का प्रायोगिक ज्ञान प्रदान किया जा रहा है। इस राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण कार्यक्रम में देश के 9 राज्यों तेलंगाना, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड, नई दिल्ली, पंजाब, हरियाणा एवं राजस्थान के कुल 17 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं, जो पशु चिकित्सा क्षेत्र में उन्नत लेप्रोस्कोपिक तकनीकों का प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो-वाइस चांसलर डॉ. हेमन्त दाधीच ने स्वागत उद्बोधन में पशु चिकित्सा शल्य चिकित्सा एवं रेडियोलॉजी विभाग, सीवीएएस, बीकानेर के गौरवशाली इतिहास, शैक्षणिक उपलब्धियों एवं तकनीकी क्षमताओं पर प्रकाश डालते हुए इस प्रकार के व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को समय की आवश्यकता बताया। विशिष्ट अतिथि डॉ. टी.के. गहलोत ने विभाग में लेप्रोस्कोपी की शुरुआत, उसके क्रमिक विकास तथा किसी भी संस्थान में लेप्रोस्कोपिक सर्जरी प्रारंभ करने की व्यवहारिक प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की। विशिष्ट अतिथि डॉ. आर.के. काजला, प्रोफेसर, एस.पी. मेडिकल कॉलेज, बीकानेर ने भारत में लैप्रोस्कोपी के ऐतिहासिक विकास क्रम तथा मानव चिकित्सा में लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के विभिन्न चरणों पर अपने समृद्ध अनुभव साझा किए। कोर्स सह-समन्वयक डॉ. महेंद्र तंवर ने बताया कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छोटे पशुओं में ऑपरेशन के दौरान कम से कम शल्य चिकित्सा के सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक कौशल को सशक्त बनाना है। डॉ. साकार पालेचा तथा डॉ. अनिल बिश्नोई प्रशिक्षण कार्यक्रम के सह-समन्वयक है।