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राजस्थान पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्‍वविद्यालय, बीकानेर
Rajasthan University of Veterinary and Animal Sciences, Bikaner (Accredited by VCI and ICAR)

प्रेस-विज्ञप्ति वेटरनरी विश्वविद्यालय स्वदेशी पशुधन संरक्षण पर दस दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन

बीकानेर, 21 फरवरी। पशुचिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय, बीकानेर के कुक्कुट विज्ञान विभाग द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आई.सी.ए.आर.), नई दिल्ली द्वारा वित्त पोषित दस दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम “सतत् कृषि एवं देशी पशुधन संरक्षणः सुरक्षित भविष्य का आधार“ का शनिवार को समापन हुआ। समापन समारोह में मुख्य अतिथि डॉ. अजित सिंह यादव, सहायक निदेशक शिक्षा, गुणवŸाा एवं सुधार (ई.क्यू.ए. एण्ड आर.) आई.सी.ए.आर. ने अपने संबोधन में कहा कि राजस्थान पशुओं की विभिन्न नस्लों के संरक्षण का प्रमुख केन्द्र है। वेटरनरी विश्वविद्यालय के पशुधन संरक्षण एवं संवर्धन हेतु सराहनीय कार्य कर रहा है। डॉ. ए.एस. यादव ने देशी पशुधन के महत्व को देखते हुए आई.सी.ए.आर. द्वारा इनके संरक्षण हेतु किए जा रहे कार्यों की विवेचना की। डॉ. यादव में बताया कि भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन मिशन कार्यक्रम के तहत देश के पशुधन का डिजिटल रिकार्ड तैयार किये जाने की योजना है। डॉ. यादव ने बताया कि नई शिक्षा नीति के तहत विद्यार्थियों हेतु उच्च शिक्षा में शैक्षणिक क्रेडिट बैंक का प्रावधान है जिसमें विद्यार्थियों की पूरी एकेडमिक प्रोग्रेस की जानकारी हासिल हो सकती है। मुख्य अतिथि डॉ. यादव ने वेटरनरी महाविद्यालय के चिकित्सा संकुल, पुस्तकालय एवं विभिन्न विभागों का अवलोकन भी किया एवं शैक्षणिक, शोध एवं प्रसार कार्यों की जानकारी हासिल की। वेटरनरी विश्वविद्यालय, बीकानेर के कुलगुरु डॉ. सुमंत व्यास ने बताया कि राजस्थान कृषि एवं पशुधन आधारित प्रदेश है यहाँ भेड़, बकरी, भैस, ऊंट की विभिन्न देशी नस्लों का पशुपालकों द्वारा संरक्षण किया जा रहा हैं। कुलगुरु डॉ. सुमंत व्यास ने बताया कि हमें पशुधन के संवर्धन हेतु और अधिक प्रयास करने होंगे ताकि इनकी गुणवत्ता एवं उत्पादकता का पूर्ण उपयोग किया जा सके। कुलगुरु डॉ. व्यास ने आई.सी.ए.आर. को विश्वविद्यालय के वित्तीय सहायता प्रदान करने हेतु धन्यवाद प्रेषित किया। कार्यकारी अधिष्ठाता एवं आई.सी.ए.आर. नोड़ल अधिकारी डॉ. राजेश कुमार धूड़िया ने विश्वविद्यालय में चल रहे आई.सी.ए.आर. परियोजनाओं को संक्षिप्त जानकारी प्रदान की। डॉ. धूड़िया ने प्रशिक्षणार्थियों को अर्जित ज्ञान को पशुधन संरक्षण एवं संवर्धन हेतु उपयोग करने हेतु निर्देशित किया। प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. अरूण कुमार झीरवाल ने बताया कि इस प्रशिक्षण में देश के 7 राज्यों से 17 प्रशिक्षणार्थियों ने भाग लिया जिनकों पशुधन संरक्षण, परम्पारागत चिकित्सा पद्धति, पंचगव्य, पशुआहार, आवास एवं स्वास्थ्य प्रबन्धन, पशुधन संरक्षण हेतु राज्य केन्द्र सरकारी की योजनाएं आदि व्याख्यानों के साथ-साथ पशुधन अनुसंधान केन्द्र, भेड़ ऊष्ट्र अनुसंधान केन्द्रो का भ्रमण करवाया गया। कार्यक्रम के दौरान मंच संचालन प्रशिक्षण सम्वयक डॉ. अमित चौधरी ने किया। प्रशिक्षण उपरान्त प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण-पत्र वितरित किये गये। कार्यक्रम के दौरान निदेशक क्लिनिक्स प्रो. प्रवीण बिश्नोई, अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. पंकज थानवी, परीक्षा नियंत्रक डॉ. सुनीता पारीक सहित संकाय सदस्य, प्रतिभागी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।