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राजस्थान पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्‍वविद्यालय, बीकानेर
Rajasthan University of Veterinary and Animal Sciences, Bikaner (Accredited by VCI and ICAR)

भेड़ों में अधिक बच्चे देने वाले कारक की पहचान तकनीक पर पेटेंट हासिल

बीकानेर, 18 मार्च। पशुचिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, बीकानेर के वैक्सिनोलॉजी एंड बायोलॉजिकल प्रोडक्ट रिसर्च सेंटर के वैज्ञानिकों को भेड़ों में मल्टीपेरस (एक बार में कई बच्चे देने वाली) और यूनिपेरस (एक बार में एक बच्चा देने वाली) भेड़ों की पहचान तकनीक के लिए पेटेंट कार्यालय, भारत सरकार द्वारा पेटेंट प्रदान किया गया है। इस तकनीक को विकसित करने में विश्वविद्यालय के डॉ. सुनील माहेरचंदानी, डॉ. कृतिका गहलोत, डॉ. मयंक कुमार अग्रवाल, डॉ. रमेश चन्द्र शर्मा, डॉ. अमित कुमार पाण्डेय, डॉ. नरेन्द्र सिंह राठौड़ तथा डॉ. बृज नन्दन श्रृंगी की प्रमुख भूमिका रही। इस तकनीक द्वारा मल्टीपेरस और यूनिपेरस भेड़ों की पहचान में पारम्परिक विधियों की तुलना में बहुत कम समय लगता है। कुलगुरु डॉ. सुमंत व्यास ने इस उपलब्धि पर सम्बिधित सभी वैज्ञानिकों को बधाई दी और कहा कि इस नवीन तकनीक का उपयोग घर या पशु फार्म पर भी आसानी से किया जा सकता है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के लिए यह विधि अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। इस तकनीक द्वारा भेड़ पालन की उत्पादकता बढ़ाने, बेहतर नस्ल चयन करने और पशुपालकों की आय में वृद्धि करने में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।